1. LCM विधि का मूल सिद्धांत (Efficiency Concept)

A किसी काम को 10 दिन में और B 15 दिन में करता है। कुल कार्य = 10 और 15 का LCM = 30 यूनिट। A की दैनिक क्षमता = 30/10 = 3 यूनिट/दिन। B की दैनिक क्षमता = 30/15 = 2 यूनिट/दिन। दोनों मिलकर 1 दिन में 5 यूनिट करते हैं, अतः पूरा काम = 30/5 = 6 दिन में समाप्त होगा।

2. बारी-बारी से कार्य करने वाले प्रश्न (Alternate Working Days)

यदि A और B एक-एक दिन छोड़कर काम करते हैं, तो 2 दिन का कार्य = 3 + 2 = 5 यूनिट। 30 यूनिट पूरा करने के लिए 6 चक्र (Cycle) लगेंगे, यानी 6 * 2 = 12 दिन। इस चक्र विधि से शेष कार्य की सटीक गणना की जा सकती है।

3. काम छोड़कर जाने वाले प्रश्न (Leaving Work Early / Later)

यदि कोई व्यक्ति काम समाप्त होने से 2 दिन पहले चला जाता है, तो उसके 2 दिन के काम को कुल कार्य में जोड़ दें और सभी से अंत तक काम कराएं। यदि कोई शुरू होने के 3 दिन बाद छोड़ता है, तो उसका काम घटाकर बाकी काम शेष लोगों से कराएं।

4. नल और टंकी (Pipes and Cisterns) में खाली करने वाला नल

भरने वाले नल की क्षमता को धनात्मक (+) और निकासी नल की क्षमता को ऋणात्मक (-) मानें। यदि नल A 12 घंटे में भरता है और B 15 घंटे में खाली करता है, तो कुल क्षमता 60 यूनिट। A की गति +5, B की गति -4, कुल गति = +1 यूनिट/घंटा, यानी टंकी 60 घंटे में भरेगी।

5. कार्यक्षमता और पारिश्रमिक (Wages) का नियम

मजदूरी का बंटवारा कभी भी दिनों के अनुपात में नहीं होता, बल्कि किए गए कार्य या कार्यक्षमता (Efficiency) के सीधे अनुपात में होता है। यदि A और B की क्षमता 3:2 है, तो ₹500 में से A को ₹300 और B को ₹200 मिलेंगे।